पटना: बिहार सरकार ने राज्य की न्यायिक व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्यभर में 100 फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने की घोषणा की है। सरकार का दावा है कि इससे लाखों लंबित मामलों के तेजी से निपटारे में मदद मिलेगी और लोगों को समय पर न्याय मिल सकेगा।
100 फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करेगी सरकार
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार में लंबित मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसे देखते हुए राज्य सरकार ने 100 नए फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने का निर्णय लिया है। इन अदालतों का उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया में तेजी लाना, सामान्य अदालतों का बोझ कम करना और गंभीर मामलों का जल्द निपटारा सुनिश्चित करना है।
18 लाख से अधिक लंबित मामलों को मिलेगी राहत
सरकार के अनुसार, बिहार की विभिन्न अदालतों में 18 लाख से ज्यादा मामले लंबित हैं। फास्ट ट्रैक कोर्ट शुरू होने के बाद इन मामलों के निपटारे की रफ्तार बढ़ेगी। खासकर संवेदनशील और गंभीर प्रकृति के मामलों को प्राथमिकता के आधार पर सुना जाएगा, जिससे आम लोगों को जल्द न्याय मिल सके।
38 जिलों और उप-मंडलों में होगा विस्तार
राज्य सरकार की योजना के तहत 38 जिलों और उप-मंडलों में चरणबद्ध तरीके से 100 फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाएंगे। पटना में सबसे अधिक आठ अदालतें प्रस्तावित हैं, जबकि गया, मुजफ्फरपुर, दरभंगा और भागलपुर समेत अन्य जिलों में भी आवश्यकता के अनुसार अदालतों की संख्या तय की गई है।
900 पदों पर होगी भर्ती
इन अदालतों के संचालन के लिए बड़े पैमाने पर नियुक्तियां भी की जाएंगी। सरकार बेंच क्लर्क, स्टेनोग्राफर, डेटा एंट्री ऑपरेटर, प्रोसेस सर्वर, ड्राइवर और चपरासी समेत विभिन्न श्रेणियों के करीब 900 पदों पर भर्ती करेगी, ताकि अदालतों का संचालन सुचारु रूप से हो सके।
कानून-व्यवस्था सुधारने की दिशा में बड़ा कदम
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना केवल लंबित मामलों को कम करने के लिए नहीं, बल्कि राज्य में कानून-व्यवस्था को और प्रभावी बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। सरकार का लक्ष्य न्यायिक प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और आम लोगों के लिए अधिक सुलभ बनाना है।